माँ नमस्कार दोस्तों आज मै आप लोगो से अपने द्वारा लिखित कविता माँ साझा कर रही हूँ | यहाँ कविता मैंने बचपन में लिखा था जब शायद मैं 8वी क्लास में थी | मुझे बचपन से ही कविता लिखने का शोक रहा है तो मैने सोचा क्यों न आप सभी से साझा करू ,मुझे अपनी माँ जैसी है उसकी हिसाब से कविता लिखा है शायद आप लोगो की माँ भी मेरी माँ जैसी हो बहुत प्यारी और हमें जान से भी ज्यादा चाहने वाली हो तो प्रियो मित्रो आप मेरे दुवारा लिखित कविता पढ़े और मुझे बताये कैसा लगा आप को आप को भी अपना बचपन याद आया की नहीं वैसे हम कितने भी बड़े क्यों न हो जाये माँ का प्यार कभी नहीं बदलता यही सच्चाई है |हमे भी अपनी माँ से उतना ही प्यार करना चाहिए जितना वो हम से करती है लेकिन माँ जैसा कोई नहीं हो सकता | माँ धरती पर भगवान का रूप है क्युकि जितना माँ करती है हमारे लिए और कोई नहीं कर सकता हमारे दुखी होने पर माँ हमसे ज्यादा दुखी होती है और हमारे खुश होने पर वो हमसे ज्यादा खुश होती है |आज मै भी एक माँ हूँ इसलिए जानती...
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