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भारत में वर्ण व्यवस्था का इतिहास

वर्ण व्यवस्था का इतिहास  उत्तर वैदिक काल में कई सामाजिक परिवर्तन हुए। समाज में विभाजन तीखा हो चला। वर्ण व्यवस्था सुदृढ़ हुई।  आश्रम व्यवस्था शुरू हुई। संयुक्त परिवार विघटित होने लगे, स्त्रियों की स्थिति में गिरावट आई। शिक्षा का विशिष्टीकरण हुआ। वर्ण व्यवस्था ऋग्वैदिक काल की वर्ग व्यवस्था वर्ण व्यवस्था में परिवर्तित हो गई। कुछ प्राचीन ग्रंथों में वर्ण व्यवस्था को ईश्वरीय माना गया है। ऋग्वेद के पुरुष सूक्त के अनुसार विराट पुरुष के मुख से ब्राह्मण, बाहुओं क्षत्रिय, जंघाओं से वैश्य और पैरों से शूद्र हुए। बाद में विराट पुरुष का स्थान ब्रह्मा ने ले लिया, परंतु इन वर्णों की उत्पत्ति का सिद्धांत वही रहा‌। कुछ वर्ण का अर्थ रंग से लेते हैं। इस आधार पर तो प्रारंभ में केवल दो ही वर्ण थे-े एक गोरे आर्यों का और दूसरा काले अनार्यों का। 2 फिर 4 वर्ण  कैसे बने वर्ण का अर्थ वरण करना या चुनना भी है। इस अर्थ के आधार पर कहा गया है कि जिस व्यक्ति ने जो धंधा चुन लिया उसके अनुसार उसका वर्ण निर्धारित हो गया। यही मत उचित प्रतीत होता है। प्राचीन दर्शन तथा धर्म ग्रंथों में ...

प्रागैतिहासिक काल-पुरापाषाण काल, मध्य पाषाण काल, नवपाषाण काल

प्रागैतिहासिक ल         पुरापाषाण काल   संभवतया 500000 वर्ष पूर्व द्वितीय हिम  के प्रारंभ काल में  भारत में मानव का अस्तित्व प्रारंभ हुआ। कुछ विद्वानों के अनुसार मानव का अस्तित्व सर्वप्रथम दक्षिण भारत में हुआ जहां सेेे वह उत्तर-पश्चिमी पंजाब गया। परंतु कुछ अन्य इतिहासका अनुसार  मानव अस्तित्व का प्रारंभ सर्वप्रथम सिंधु और झेलम नदी केेे उत्तर पश्चिम केेे पंजाब प्रदेश और जम्मूू में हुआ । तत्पश्चा मानव इस युग में गंगा यमुना के दोआब को छोड़कर राजपूतानाा, गुजरात , बंगाल ,बिहार,उड़ीसा और संपूर्ण दक्षिण भारत में फैल गया। भारत के इन विभिन्न स्थानों पर इस युग के मानव द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले हथियार प्राप्त हुए हैं। अनुमानतय  यह युग ईसा पूर्व  25000 वर्ष पूर्व तक माना गया है।  पुरापाषाण काल को भी अब तीन भागों में विभक्त किया गया है १- पूर्व पुरापाषाण काल-पूर्व पुरापाषाण काल  के अवशेष उत्तर पश्चिम के सोहन क्षेत्र (सोहन सिंधु नदी की एक सहायक नदी थी) मैं प्राप्त हुए हैं। इस काल के अवशेष नर्मदा नदी तथा उसकी सहायक...

प्राचीन भारतीय इतिहास जानने के स्रोत

प्राचीन भारतीय  इतिहास के स्रोत नमस्ते दोस्तों आज  मै  आप सब को प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के बारे में बताऊंगी  स्रोत इस प्रकार है  १ .साहित्यिक स्रोत धार्मिक साहित्य - धार्मिक साहित्य में हिन्दू ,बौद्ध और जैन धर्म ग्रन्थ शामिल है   |  1.हिन्दू धर्म ग्रन्थ -हिन्दू धर्म ग्रन्थ के अंतर्गत प्रमुख स्थान सहिताओं का है जिनमे चार वेद -ऋग्वेद ,सामवेद ,यजुर्वेद,अथर्ववेद शामिल है। इनके अलावा ब्राह्मण (एतरेय ,शतपथ ,पंचविंश आदि ),उपनिषद आरण्यक ,वेदांग या उपवेद (शिक्षा ,क्लप ,व्याकरण आदि -कुल छः )उपवेद (आयुर्वेद ,धनुर्वेद आदि ),सूत्र ग्रन्थ (धर्म सूत्र ,गृहसूत्र आदि )स्मृति ग्रन्थ (मनु -स्मृति ,नारद स्मृति, गौतम स्मृति,बृहस्पति स्मृति आदि )पुराण (विष्णु पुराण ,मत्स्य पुराण वायु पुराण आदि -कुल १८ )और गाथा ग्रन्थ (रामायण और महाभारत )प्रमुख ग्रन्थ है। इनसे हमे वैदिक काल और उसके बाद के समय के राजनैतिक और तात्कालिक सभ्यता और संस्कृति का ज्ञान प्राप्त होता है।  ऋग्वेद से हमे पूर्व -वैदिक काल की सभ्यता का पता चलता है...