बुढ़ापे की गलती शाम की सैर के लिए निकले हुए न्यायाधीश के सलाहकार मोहन ने बिजली के एक खंभे का सहारा ले कर एक ठंडी सांस ली | एक सप्ताह पहले जब वह शाम की सैर से वापस आ रहा था तो ठीक उसी जगह उसकी पुरानी नौकरानी ने उसे रोक लिया था ,और धमकाते हुए कहा था "ठहर जा पापी। मैं भी तुझे ऐसा पाठ पढ़ाऊंगी की तुम भोली भाली लड़कियों को खराब करना भूल जाएगा। मैं बच्चा तेरे दरवाजे पर छोड़ जाऊंगी, तुझ पर मुकदमा चलाऊंगी, और तेरी पत्नी को भी सब कुछ बता दूंगी। यही नहीं.......''और इस के साथ ही नौकरानी ने कहा कि तुम बैंक में उसके नाम 500000 रुपए जमा कर दे। अब फिर मोहन को 1 सप्ताह पहले की यह घटना याद आ गई। उसने एक ठंडी सांस ली, और मन ही मन अपने आप को एक बार फिर उस क्षणिक वासना के लिए धिक्कारा, जिसके लिए अब उसे इतनी चिंता और परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मोहन जब से से वापस अपनी कोठी पर पहुंचा दो ठीक 10:00 बजे रहे थे। चांद का एक छोटा टुकड़ा बादलों की ओट से झांक रहा था। परेशानी के कारण वह अपने आपको थका हुआ अनुभव कर रहा था इसीलिए दरवाजे के बाहर की सीढ़ियों पर आराम करने के लिए बैठ गया। गली मे...
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